देश भक्ति
देश भक्ति
चिंटू विद्यालय से बड़ी खुशी-खुशी आया। आकर उसने मां से बड़ी तत्परता से कहा- आज विद्यालय में हमे एक नई चीज पता चली।
मां ने चिंकू को सहलाते हुए कहा- क्या?
चिंटू ने कहा- आज मास्टर जी विद्यालय में हमें बताया कि स्वतंत्रता दिवस आ रहा है। हम सबमें देश प्रेम की भावना होनी चाहिए। देश भक्ति के लिए बहुत कार्य या बलिदान होना आवश्यक नहीं है, अपितु हम छोटे-छोटे कार्यों से भी देश भक्ति प्रदर्शित कर सकते हैं। जैसे- किसी को दुःख न देना, दीन दु:खी पीड़ितों की सेवा करना, अपना काम ईमानदारी से करना, शासकीय संपत्ति की सुरक्षा करना आदि।
देखते-देखते स्वतंत्रता दिवस आ गया। स्वतंत्रता दिवस के लिए मास्टर जी ने सभी छात्रों को साफ-सुथरे कपड़े पहनकर सुबह शीघ्र ही बुलाया था। चिंटू भी शीघ्र ही विद्यालय जाने के लिए घर से निकला। रात भर से बारिश हो रही थी।
सभी छात्र समय से विद्यालय पहुंच गए थे। चिंटू नहीं पहुंचा था। विद्यालय से प्रभात फेरी निकाली गई। रास्ते में ही चिंटू सड़क किनारे कीचड़ से सना हुआ मिला।
मास्टर जी ने चिंटू से पूछा- तुम आज विद्यालय क्यों नहीं आए।
चिंटू ने पहले मास्टर जी को प्रणाम किया। फिर कहा- मास्टर जी आपने ही कहा था, देश की सेवा करने के लिए बहुत बड़े कार्य करने की आवश्यकता नहीं है। हम छोटे-छोटे कार्यों से भी देश भक्ति प्रदर्शित कर सकते हैं।
हां, यह सत्य है। लेकिन तुम यह क्या कर रहे हो?
चिंटू ने कहा- मैं देश सेवा कर रहा हूं। मैं जानता था कि इसी रास्ते से प्रभात फेरी निकाली जाएगी। बारिश के कारण इस मार्ग पर पानी जमा हो गया है। इस मार्ग पर चलने से सबके कपड़े कीचड़ से सन जाता। इसलिए मैं मार्ग किनारे से धीरे-धीरे कीचड़-मिट्टी हटा रहा था। धीरे-धीरे कर पानी निकल गया। अब इस मार्ग पर चलने वालों के कपड़े कीचड़-मिट्टी से सनेंगे नहीं।
लेकिन तुम्हारे कपड़े तो मैले हो गए।
चिंटू- मेरे कपड़े मैले हो गए तो क्या हुआ, मुझे खुशी है, मेरे इस प्रयास के कारण दूसरों के कपड़े अब मैले नहीं होंगे।
मास्टरजी ने कहा- चिंटू, आज तुमने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अपनी सच्ची देशभक्ति प्रदर्शित किया है।
डॉ. लूनेश कुमार वर्मा
रायपुर छत्तीसगढ़