पसंद

पसंद 

मैं गांव से बाहर शहर में रहकर पढ़ाई कर रहा हूं। इसलिए गांव जाना प्रायः कम होता है। घर पर मेरा एक भाई और बहन भी है। वे दोनों मुझसे छोटे हैं। गांव में ही माता-पिता के साथ उनका रहना होता है।

मैं जब भी गांव जाता हूं, मां को पहले से ही मेरे आने का आभास हो जाता है और वह मेरी पसंद की चीज बना कर रखती। मनपसंद चीजों को देखकर मेरा मन प्रफुल्लित हो जाता। वैसे तो घर में सबसे मेरा अच्छा संबंध है। किंतु पता नहीं क्यों मां मुझे बहुत प्रिय लगती हैं, उनसे विशेष अपनापन लगता है। 

ऐसा नहीं की मां केवल मेरी पसंद की चीज ही बनाती हैं, अपितु कभी छोटे भाई की पसंद, बहन की पसंद या कभी पिता के पसंद की चीजें वह बनाती थीं। जिसे जो चीज पसंद है, वह उन्हें अधिक परोसती थीं। 

एक दिन हम तीनों भाई बहनों में बात चली की मां की पसंद की चीज क्या है? और घर में वह चीज कब बनी है? 

छोटे भाई ने कहा- मुझे जो चीज पसंद है, वही मां को भी पसंद है। 

बहन ने कहा- नहीं, मुझे जो चीज पसंद है, वही मां को पसंद है।

इसी बीच पिताजी आ गए। उन्होंने पूछा- क्या कानाफूसी हो रही है? 

छोटे भाई ने कहा- मां को कौन सी चीज पसंद है, यह हम आपस में जानना चाह रहे हैं। 

पिताजी ने कहा- अरे! यह बात तो अभी तक मुझे भी पता नहीं है। 

शाम के समय जब भोजन के लिए हम सभी बैठे। आज घर में विशेष रूप से खीर-पूड़ी और जिमीकंद का साग बना था। ये चीजें मेरी विशेष रूप से पसंद की हैं। मां ने सम्भवतः मुझे आया हुआ जानकर मेरे लिए विशेष रूप से बनाया था। 

बहन ने इसी समय कहा- आज तो भैया के पसंद की चीजें बनीं हैं।

छोटू ने धीरे से कहा- चलो मां से पूछते हैं, उनकी पसंद की चीज क्या है?

मैंने सहमति दिया। 

बहन ने पूछा- मां! …तुम हम सबकी पसंद की चीजें बनातीं हो। तुम्हारी पसंद क्या है?

मां ने सकुचाते हुए बड़े प्रेम से खीर-पुड़ी परोसते हुए बोली- तुम सबकी खुशी ही मेरी पसंद है।

डॉ. लूनेश कुमार वर्मा

रायपुर छत्तीसगढ़ 

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