कलियुग की नारी



भारत है देश हमारा आदिकाल से नारी सम्मान।

माता भगिनी पुत्री गृहिणी सदैव दात्री संस्कार।


नारी रही है पूजनीया समाज उन्नति के द्वार।

पिता भ्राता पुत्र बन पुरुष करता सदा सत्कार।


बदलता रहा समय बदलते लोगों के विचार।

नारायणी कबसे घरों में पर्दों में ही व्यवहार?


पाश्चात्य संस्कृति प्रभाव बदला आचार-विचार।

शिक्षा-समता का अधिकार पा उन्मुक्त व्यवहार।


महिला अधिकार सुरक्षा देख कानून संविधान।

अधिकारों का दुरुपयोग जंजाल बना प्रावधान।


अधिकारों के ओट पुरुषों पर हो रहा अत्याचार। 

कलियुग की नारी रचती प्रपंच मनमानी प्रहार। 


आधुनिक समाज में स्त्री स्वतंत्रता शील साज।

सांस ले नहीं पा रहा समाज हो रहा नंगा नाच।


सोनम जैसी फांसने कर रही नित विविध उपाय।

साजिश रच विवाह बंधन प्रेमी संग विविध रास।


धन-संपत्ति सब लूटने घोंट रही जन विश्वास।

कलियुग की नारी पता नहीं क्या तेरा अरमान।


क्या मिलता है यूं बदनाम कर प्रतिष्ठित समाज।

बंद नकल पाश्चात्य संस्कृति बचे देश का मान।


डॉ. लूनेश कुमार वर्मा 

रायपुर छत्तीसगढ़

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