मिट्टी के खिलौने जैसा

मिट्टी के खिलौने जैसा 


जब सीखना चाहते हैं कोई काम।

छोड़ना होता है पहचान और नाम।


मिट्टी के खिलौने जैसा बनना होता है। 

अबोध बालक बन झुकना पड़ता है।


गुरु जैसा चाहे वैसा करना होता है। 

स्वयं को किनारे रख चलना होता है।


गुरु वाक्य आदर्श मान करो आचरण।

सफलता के अटल पथ पर अग्रसर। 


विश्वास जीतें बड़ों की खूब सेवा कर।

मिलेगा मीठा निर्मल जल कूप की तरह।


बच्चे खेलते खिलौनों से लड़ते-मिलते।

स्वभाव बिल्कुल वैसा ही हसते-खेलते।


गांठ न बांधना कभी डांट फटकार का।

सबक छुपा होता है अपने सत्कार का।


न करें हड़बड़ी सीखना समय के साथ।

धीरे-धीरे ही सही मजबूत बढ़ाएं पांव।


खिलौनों से खेलते खेलते होते होशियार।

करो नित अभ्यास है मूल मंत्र सदाबहार।


सीखने में लचीलापन है बहुत उपयोगी।

रहें सदा विनयशील बनाएं रखें सहयोगी। 


डॉ. लूनेश कुमार वर्मा 

रायपुर छत्तीसगढ़ 

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