रति की सुंदरता
रति की सुंदरता
जब होता है किसी नायक नायिका में प्रेम।
बन जाते हैं दोनों कामदेव और रति रूप।
शनै: शनै: बसते चले आते हैं मन में।
बंधते जाते वे एक दूसरे के आकर्षण में।
चैन नहीं रहता उन्हें परस्पर संपर्क के।
ढूंढ लेते बहाना बाधा कर पार मिलने के।
अनोखा आत्मिक सुख अनुभव होता अपार।
जब-जब आशा की होती जागृति-साक्षात्कार।
परस्पर होते उत्तेजित भाता अपूर्व संसार।
हो मिलन बस यही अभिलाषा हिलोर सार।
नायक बखान नायिका के नख-शिख का।
कामदेव खो जाना चाहता स्वयं को भूल।
एकाकार की लालसा आकर्षण का मूल।
भ्रमर की तरह रसपान रति की सुंदरता का।
करते नव सृष्टि का सृजन भूमि उर्वरा सींच।
खो जाना चाहते दुनिया को कर विस्मृत।
डॉ. लूनेश कुमार वर्मा
रायपुर छत्तीसगढ़