मां के जैसा प्यार

मां के जैसा प्यार


करते सब प्यार मुझे 

मैं हूं छोटी सी गुड़िया 

मैं हूं सबकी दुलारी 

मां की रानी बिटिया।


सब खेलते मेरे साथ 

खेल तरह तरह से 

मां खेलती खिलाती 

आनंद सागर जैसे।


उंगली पकड़ चलती मैं 

कभी किसी की गोदी भी 

मां संग चलती कम

चिपती रहती कभी भी।


सब बोलते मीठे बोल 

हंसकर देती साथ सदा

मां बोलती तो लगता 

हृदय में स्पंदन हुआ।


सबके संग खाती बैठ

नहीं भरता कभी पेट

गोदी बिठा खिलाती मां 

नहीं रहता कुछ भी शेष।


याद है सबका प्यार 

घर परिवार में दुलार 

मां के जैसा प्यार कहां 

अनमोल है ये उपहार।


डॉ. लूनेश कुमार वर्मा 

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